May 10, 2026

तमनार क्षेत्र में 19 मई को प्रस्तावित पेलमा कोयला खदान की जनसुनवाई के विरोध में उतरे आकाश शर्मा, अदाणी ग्रुप पर लगाए गंभीर आरोप

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तमनार क्षेत्र में 19 मई को प्रस्तावित पेलमा कोयला खदान की जनसुनवाई का विरोध

तमनार जनसुनवाई के विरोध में उतरे आकाश शर्मा, अदाणी ग्रुप पर लगाए गंभीर आरोप

जल-जंगल-जमीन बचाने की लड़ाई लड़ेगी यूथ कांग्रेस : आकाश शर्मा

पेलमा कोयला परियोजना से गांव उजड़ने का खतरा, ग्रामीणों में नाराजगी

अदाणी परियोजनाओं से आदिवासी अस्तित्व पर संकट : यूथ कांग्रेस

ग्रामीणों की सहमति बिना जनसुनवाई हुई तो होगा उग्र लोकतांत्रिक विरोध

रायपुर। यूथ कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष आकाश शर्मा ने आरोप लगाया है कि अदाणी ग्रुप की खनन परियोजनाओं के कारण छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में जल, जंगल और जमीन पर लगातार संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई हो रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और स्थानीय ग्रामीणों के जीवन एवं आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
आकाश शर्मा ने कहा कि हसदेव अरण्य, बस्तर, रायगढ़ सहित कई क्षेत्रों में अदाणी ग्रुप की परियोजनाओं के चलते हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। खनन विस्तार के नाम पर आदिवासी समुदायों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिससे उनकी संस्कृति, परंपरा और अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट हितों को संरक्षण देने के लिए प्रशासन ग्रामीणों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में 19 मई को प्रस्तावित पेलमा कोयला खदान की जनसुनवाई स्थानीय जनता की इच्छा के खिलाफ आयोजित की जा रही है। ग्रामीण लगातार इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे गांवों के विस्थापन, जल स्रोतों के प्रभावित होने और पर्यावरण को व्यापक नुकसान की आशंका है।

यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अदाणी ग्रुप प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जबकि स्थानीय लोगों को विस्थापन, प्रदूषण और बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों की सहमति के बिना जबरन जनसुनवाई कराने की कोशिश की गई, तो यूथ कांग्रेस आदिवासी समाज और स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से जोरदार विरोध करेगी।

आकाश शर्मा ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का है, न कि बड़े कॉर्पोरेट घरानों का। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि 19 मई की जनसुनवाई तत्काल निरस्त की जाए तथा परियोजना की निष्पक्ष समीक्षा कर पर्यावरण संरक्षण और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

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